विभुवन संकष्टी चतुर्थी 2026 आज: जानें व्रत का महत्व और किन लोगों के लिए है ये व्रत खास
नई दिल्ली: हिंदू पंचांग के अनुसार आज विभुवन संकष्टी का व्रत रखा जा रहा हैष भागवान गणेश को समर्पित यह विशेष संकष्टी चतुर्थी अधिक मास में पड़ने के कारण बेहद शुभ मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से गणेश जी की पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
इस महीने आने वाली संकष्टी चतुर्थी की तुलना में विभुजन संकष्टी चतुर्थी का महत्व अधिक माना जाता है, क्योंकि यह अधिक मास के दौरान आती है। ज्योतिष और धर्मशास्त्र के अनुसार अधिक मास में किए गए व्रत, दान और पूजा-पाठ का फल कई गुना बड़ जाता है।
क्या है विभुवन संकष्टी चतुर्थी?
धार्मिक ग्रंथों में “विभुवन” का अर्थ तीनों लोकों (स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल) से बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की आराधना करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
यह व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जो जीवन में लगातार परेशानियों, आर्थिक चुनौतियों या कार्यों में रुकावटों का सामना कर रहे हैं।

आज कब तक है विभुवन चतुर्थी?
पंचांग के अनुसार विभुवन संकष्टी चतुर्थी का व्रत 3 जून 2026, यानी आज रखा जा रहा है। व्रती पूरे दिन उपवास रखकर रात में चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोलेगी।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बाद ही पूर्ण माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित करने के बाद व्रत खोलते हैं।
किन लोगों के लिए खास माना जाता है यह व्रत
भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है। इसलिए यह व्रत उन लोगों द्वारा विशेष रूप से किया जाता है जो अपने जीवन की बाधाओं को दूर करना चाहते हैं। संतान सुख की कामना रखने वाले दंपत्ति, व्यवसायी, नौकरीपेशा लोग और विद्यार्थी भी इस दिन गणेश पूजा करते हैं।
देश के कई राज्यों, खासकर महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत में इस व्रत को श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

गणेश जी की आराधन कैसे करें
विभुवन संकष्टी चतुर्थी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र के सामने पूजा करते हैं। गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लड्डू और फल अर्पित किए जाते हैं। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को गणेश आरती और व्रत कथा का पाठ किया जाता है।
रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें अर्घ्य दिया जाता है और इसके बाद व्रत को खोला जाता है।
अनोखे तथ्य
- यह व्रत हर 3 साल में लगभग एक बार आता है।
- अधिक मास को “मलमास” भी कहा जाता है और इसमें किए गए अच्छे कार्य का फल असीम होता है।
- गणेश पुराण में इसका विशेष उल्लेख है।
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क्यों माना जाता है विशेष?
धर्मशास्त्रों के अनुसार अधिक मास में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का पुण्य सामान्य दिनों की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश की पूजा से बुद्धि, ज्ञान, धन और सफलता की प्राप्ति होती है। साथ ही परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
विभुवन संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करने और जीवन के संकटों से मुक्ति पाने का महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया यह व्रत भक्तों के लिए मंगलकारी और फलदायी माना जाता है।
आज देशभर में लाखों श्रद्धालु भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर सुख, समृद्धि और बाधा-मुक्त जीवन की कामना कर रहे हैं।
