दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि SRCC जैसे संस्थानों की भूमिका भारत को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में निर्णायक रही है।
नई दिल्ली | 2 जनवरी, 2026
देश के अग्रणी वाणिज्य और अर्थशास्त्र शिक्षण संस्थानों में शुमार श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) ने शुक्रवार को नॉर्थ कैंपस में आयोजित सेंटेनरी कर्टन रेज़र कार्यक्रम के साथ अपने शताब्दी समारोहों का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर शिक्षा, नीति, उद्योग और सार्वजनिक जीवन से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों तथा पूर्व छात्रों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही।
1926 से 2026 तक के सौ वर्षों की यात्रा में प्रवेश करते हुए SRCC ने अपने उस अकादमिक और बौद्धिक योगदान को सामने रखा, जिसने भारत की आर्थिक और प्रशासनिक संरचना के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कार्यक्रम के दौरान वर्षभर आयोजित होने वाले शैक्षणिक सम्मेलनों, नीति संवादों, अंतरराष्ट्रीय सहयोगों और पूर्व छात्र सहभागिता से जुड़ी पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश सिंह रहे। उनके साथ एसआरसीसी गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन श्री अजय एस. श्रीराम भी मंच पर मौजूद थे। समारोह की शुरुआत संस्थापक उद्योगपति सर श्रीराम को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ हुई, जिन्होंने 1920 में ‘द कमर्शियल स्कूल’ के रूप में इस संस्था की नींव रखी थी।
इस अवसर पर Timeless Frames नामक एक स्मारक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया गया, जिसमें दरियागंज से लेकर वैश्विक पहचान तक SRCC की सौ वर्षों की यात्रा को संजोया गया है।
सभा को संबोधित करते हुए प्रो. योगेश सिंह ने SRCC को “वैश्विक स्तर पर प्रतिष्ठित अकादमिक ब्रांड” बताते हुए कहा कि इसका योगदान केवल रैंकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने पीढ़ियों को गढ़ने और राष्ट्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि भारत के दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की उपलब्धि में SRCC जैसे संस्थानों द्वारा तैयार किए गए अर्थशास्त्रियों, नीति-निर्माताओं और उद्यमियों का बड़ा योगदान है। उन्होंने कॉलेज से उद्यमिता, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल फाइनेंस और बिज़नेस इनक्यूबेशन जैसे उभरते क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।
एसआरसीसी गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन श्री अजय एस. श्रीराम ने कहा कि सेंटेनरी कर्टन रेज़र आत्ममंथन के साथ भविष्य की दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों से शुरू होकर देश के शीर्ष वाणिज्य संस्थान बनने तक की यात्रा सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने अकादमिक उत्कृष्टता, शोध, बुनियादी ढांचे, एआई-सक्षम शिक्षा और पूर्व छात्र सहभागिता को भविष्य की प्राथमिकताएं बताया।
SRCC की प्राचार्य प्रो. सिमृत कौर ने कहा कि शताब्दी समारोह शिक्षकों, छात्रों और पूर्व छात्रों की साझा उपलब्धि का उत्सव है। उन्होंने कहा कि संस्था आगे भी नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी पर आधारित नेतृत्व विकसित करने के अपने संकल्प पर कायम रहेगी।
कार्यक्रम में शामिल प्रतिष्ठित पूर्व छात्रों ने सार्वजनिक जीवन और उद्योग में SRCC के प्रभाव को साझा किया। स्वर्गीय अरुण जेटली की पत्नी संगीता जेटली ने उनके जीवन पर SRCC के गहरे प्रभाव को याद करते हुए कहा कि कॉलेज ने उनके विचारों और मूल्यों को मजबूत आधार दिया।
पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए. के. सीकरी, FDCI के चेयरमैन सुनीत सेठी, उद्योगपति स्मिनु जिंदल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विजय गोयल और उद्यमी नीरज घेई सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने SRCC की अकादमिक संस्कृति और नेतृत्व निर्माण की भूमिका की सराहना की।
समारोह का समापन ऐतिहासिक परिसर में दीप प्रज्वलन और कथक–भरतनाट्यम जुगलबंदी व संगीत प्रस्तुति के साथ हुआ, जिसने SRCC की अगली सदी की शुरुआत को सांस्कृतिक श्रद्धांजलि के रूप में चिह्नित किया।
