जापान को पीछे छोड़कर वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में भारत की ऐतिहासिक छलांग को सुधारों, नीति स्थिरता और मजबूत शासन का परिणाम बताया गया।
नई दिल्ली | 1 जनवरी 2026
नववर्ष 2026 की शुरुआत भारत के लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि के साथ हुई है। वर्ष 2025 के अंतिम दिन जापान को पीछे छोड़ते हुए भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया। इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर वरिष्ठ पत्रकार सुरिंदर वर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और प्रशासनिक फैसलों की सराहना की है।
सुरिंदर वर्मा ने कहा कि वैश्विक आर्थिक मंच पर भारत की यह उपलब्धि अचानक नहीं आई है, बल्कि यह वर्षों से जारी संरचनात्मक सुधारों, स्पष्ट नीति दृष्टि और निरंतर प्रयासों का स्वाभाविक परिणाम है। उन्होंने कहा कि किसी विकसित अर्थव्यवस्था को पीछे छोड़ना इस बात का प्रमाण है कि भारत की विकास रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे के निर्माण, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के विस्तार, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वित्तीय अनुशासन पर जिस तरह लगातार ध्यान दिया, उससे भारतीय अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। वैश्विक मंदी और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की विकास दर का संतुलित रहना इसी रणनीति की सफलता को दर्शाता है।
वरिष्ठ पत्रकार ने कहा, “दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनना केवल आंकड़ों की उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह निर्णायक शासन, दीर्घकालिक सुधारों और नीति निरंतरता की जीत है।”
नाममात्र जीडीपी के आधार पर भारत अब केवल अमेरिका, चीन और जर्मनी से पीछे है। वर्मा के अनुसार, यह स्थिति वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका, विश्वसनीयता और प्रभाव को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
उन्होंने नए साल की शुरुआत में इस उपलब्धि को देश के बढ़ते आत्मविश्वास और उभरती वैश्विक आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर बताया।
