अंतरिक्ष चिप्स से रक्षा तकनीक तक, MERI-SIA सम्मेलन में क्या हुआ?
नई दिल्ली: अंतरिक्ष में इस्तेमाल होने वाली विशेष चिप्स से लेकर रक्षा संचार और समुद्री रणनीति तक, कई महत्वपूर्ण तकनीकी मुद्दों पर नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन में चर्चा हुई। एमईआरआई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस ने एसआईए-इंडिया और अपने अंतरिक्ष अध्ययन विभाग के साथ मिलकर यह कार्यक्रम आयोजित किया।
एमईआरआई परिसर के तारामंडल में हुए सम्मेलन में रक्षा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारियों, अंतरिक्ष वैज्ञानिकों, नीति विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा का प्रमुख उद्देश्य अंतरिक्ष चिप्स के निर्माण, सेमीकंडक्टर तकनीक और इस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को मजबूत करने के तरीकों पर विचार करना था।
एमईआरआई के उपाध्यक्ष प्रो. ललित अग्रवाल ने कार्यक्रम का प्रारंभिक संबोधन दिया। एसआईए-इंडिया के पवन कपूर ने भारत के अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी तंत्र को मजबूत करने की रूपरेखा प्रस्तुत की। सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (एससीएल) के महानिदेशक डॉ. कमलजीत सिंह ने स्वदेशी अंतरिक्ष-ग्रेड चिप्स के महत्व पर जोर दिया।
लेफ्टिनेंट जनरल पीजेएस पन्नू ने रक्षा संचार और अंतरिक्ष निगरानी में विकिरण-रोधी माइक्रोचिप्स की उपयोगिता पर चर्चा की। वहीं, कर्नल अनुराग अवस्थी, मेजर जनरल रवि चौधरी और योगेश शिंदे सहित विशेषज्ञों ने सेमीकंडक्टर निर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित युद्ध प्रणालियों, एमईएमएस, विशेष सेंसर और फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन में तकनीकी चर्चा के साथ समुद्री क्षेत्र में अंतरिक्ष तकनीक के इस्तेमाल पर भी ध्यान दिया गया। इस दौरान ‘समुद्र विज्ञान और ब्लू इकोनॉमी में अंतरिक्ष की भूमिका’ रिपोर्ट जारी की गई। इसके बाद परिचर्चा में भारत की समुद्री रणनीति को मजबूत बनाने और विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को हासिल करने में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की संभावनाओं पर विचार हुआ।
एयर कमोडोर हिमांशु गोपाल ने समापन संबोधन दिया और सम्मेलन को सफल बनाने में योगदान देने वाले प्रतिभागियों तथा सहयोगियों का धन्यवाद किया।
