एशियन गेम्स 2026 टीम से बाहर होने पर मनिका बत्रा ने उठाए सवाल
भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स 2026 की टीम से बाहर किए जाने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और खेल मंत्री मनसुख मांडविया से हस्तक्षेप की अपील करते हुए चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग की है।
नई दिल्ली: भारत की स्टार टेबल टेनिस खिलाड़ी और देश की सबसे सफल महिला पैडलरों में शामिल मनिका बत्रा ने एशियन गेम्स 2026 के लिए भारतीय टीम में जगह नहीं मिलने के बाद चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई किसी विशेष छूट या टीम में जगह पाने के लिए नहीं, बल्कि खिलाड़ियों के लिए एक पारदर्शी और समान चयन प्रणाली सुनिश्चित करने के लिए है।
मनिका ने कहा कि उन्हें टीम से बाहर किए जाने के पीछे कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। अगर जल्द ही संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो वह कानूनी विकल्पों का भी सहारा ले सकती हैं।
कौन हैं मनिका बत्रा?
दिल्ली में 15 जून 1995 को जन्मी मनिका बत्रा भारतीय टेबल टेनिस की सबसे चर्चित और सफल खिलाड़ियों में से एक हैं। उन्होंने कम उम्र में ही टेबल टेनिस खेलना शुरू किया और अपने शानदार प्रदर्शन से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन किया।
वह दो ओलंपिक (रियो 2016 और टोक्यो 2020) में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। टोक्यो ओलंपिक में वह एकल स्पर्धा के राउंड ऑफ-32 तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी थीं।
मनिका की बड़ी उपलब्धियां
- 2018 राष्ट्रमंडल खेल (गोल्ड कोस्ट) में दो स्वर्ण पदक।
- 2018 एशियन गेम्स में मिक्स्ड डबल्स में कांस्य पदक, जो इस स्पर्धा में भारत का पहला पदक था।
- 2016 दक्षिण एशियाई खेलों में तीन स्वर्ण पदक।
- एशियन कप में कांस्य जीतने वाली पहली भारतीय महिला।
- कई एशियन चैंपियनशिप और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में पदक।
- मई 2024 में विश्व रैंकिंग में करियर की सर्वश्रेष्ठ 24वीं रैंक तक पहुंचीं।
उनकी आक्रामक शैली और बेहतरीन तकनीक ने भारतीय महिला टेबल टेनिस को नई पहचान दिलाई है।
क्या है पूरा विवाद?
TTFI ने हाल ही में 2026 एशियन गेम्स के लिए 10 सदस्यीय टीम का ऐलान किया। महिला टीम की कमान श्रीजा अकुला को सौंपी गई, जिनके साथ यशस्विनी घोरपड़े, दिया चितले, सुतीर्था मुखर्जी और सिंड्रेला दास को टीम में शामिल किया गया। मनिका बत्रा और स्वस्तिका घोष को रिजर्व खिलाड़ियों की सूची में रखा गया।
दिलचस्प बात यह है कि अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में मनिका भारत की दूसरी सबसे ऊंची रैंक वाली महिला खिलाड़ी हैं, फिर भी उन्हें मुख्य टीम में जगह नहीं मिली।
फेडरेशन की चयन नीति के अनुसार—
- 50 प्रतिशत महत्व राष्ट्रीय रैंकिंग को,
- 40 प्रतिशत महत्व विश्व रैंकिंग को,
- और 10 प्रतिशत चयन समिति के विवेक को दिया जाता है।
मनिका अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगितियों में व्यस्त रहने के कारण कई घरेलू टूर्नामेंट नहीं खेल सकीं, जिससे उनकी राष्ट्रीय रैंकिंग प्रभावित हुई। विश्व रैंकिंग में वह कट-ऑफ के समय 51वें स्थान पर थीं और बताया जा रहा है कि वह केवल तीन अंक से मुख्य टीम में जगह बनाने से चूक गईं।
मनिका का पक्ष
मनिका बत्रा ने सोशल मीडिया और अपने बयान में कहा कि उनका चयन न होना निराशाजनक है, लेकिन उससे भी ज्यादा दुखद यह है कि उन्हें कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया।
उन्होंने कहा,
“मैं टीम में जगह या किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रही हूं। मैं सिर्फ यह जानना चाहती हूं कि चयन के लिए कौन से नियम अपनाए गए और उन्हें किस तरह लागू किया गया। खिलाड़ियों के साथ समान और पारदर्शी व्यवहार होना चाहिए।”
पीएम मोदी और खेल मंत्री से लगाई गुहार
मनिका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मांडविया, भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) और संबंधित अधिकारियों से हस्तक्षेप करने की अपील की है। उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि भविष्य में किसी खिलाड़ी को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।
TTFI और IOA का पक्ष
TTFI के एक सूत्र के अनुसार फेडरेशन ने अपनी पहले से तय और वेबसाइट पर सार्वजनिक नियमावली (जो 9 मई 2023 से लागू है) का सख्ती से पालन किया है, और इसमें किसी तरह की बदनीयती नहीं है। भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने भी इस मामले से दूरी बना ली है — IOA के सीईओ रघुराम अय्यर ने कहा कि चयन का मामला पूरी तरह संबंधित खेल फेडरेशन का अधिकार क्षेत्र है, और वे सिर्फ यह देखते हैं कि तय नीति का पालन हुआ या नहीं। TTFI को टीम की पूरी सूची 10 जून 2026 तक IOA को सौंपनी थी, और टीम का चयन 9 जून को मनिका के बिना ही कर लिया गया था।
बड़ा सवाल: खेल प्रशासन में पारदर्शिता
यह मामला सिर्फ एक खिलाड़ी की नाराज़गी भर नहीं है, बल्कि भारतीय खेल प्रशासन में चयन प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर एक बड़ा सवाल भी खड़ा करता है। घरेलू टूर्नामेंट में हिस्सेदारी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए — यह सवाल टेबल टेनिस के अलावा अन्य खेलों में भी उठता रहा है।
मनिका बत्रा, जो भारत की सबसे सम्मानित और अनुभवी खिलाड़ियों में हैं, इस लड़ाई को व्यक्तिगत फायदे के लिए नहीं बल्कि चयन प्रणाली में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लड़ रही हैं। उनकी आवाज़ का खेल जगत में खासा वज़न है।
खेल मंत्रालय और TTFI की तरफ से अभी तक कोई विस्तृत सार्वजनिक जवाब नहीं आया है। एशियन गेम्स की टेबल टेनिस स्पर्धाएं 20 से 28 सितंबर 2026 तक आइची-नागोया में होनी हैं। तब तक यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और फेडरेशन इस विवाद को कैसे सुलझाते हैं, और मनिका को न्याय मिलता है या नहीं
