Commonwealth Games 2026: उद्घाटन समारोह से पहले ही भारत को मिला पहला पदक, लवलीना बोर्गोहेन ने रचा इतिहास
Commonwealth Games 2026: टोक्यो ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता लवलीना बोरगोहाईं को महिलाओं की 75 किग्रा बॉक्सिंग स्पर्धा में सीधे सेमीफाइनल में जगह मिली
नई दिल्ली: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही भारत के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। देश की स्टार मुक्केबाज और टोक्यो ओलंपिक कांस्य पदक विजेता लवलीना बोर्गोहेन ने भारत का पहला पदक सुनिश्चित कर दिया है। महिला 75 किलोग्राम भार वर्ग में उन्हें सीधे सेमीफाइनल में प्रवेश (बाय) मिला है, जिसके चलते उनका कम से कम कांस्य पदक तय हो गया है।
कॉमनवेल्थ गेम्स के मुक्केबाजी नियमों के अनुसार, सेमीफाइनल में हारने वाले दोनों खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है। ऐसे में लवलीना बिना पहला मुकाबला खेले ही पदक जीतने वाली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं।
आखिर बिना खेले कैसे मिला पदक?
दरअसल इस बार महिलाओं के 75 किग्रा भार वर्ग में सिर्फ पांच मुक्केबाजों ने ही हिस्सा लिया है। इतने छोटे ड्रॉ की वजह से तीन खिलाड़ी सीधे सेमीफाइनल में पहुंच गए, जबकि बाकी दो के बीच क्वार्टर फाइनल का एक ही मुकाबला होना है। लवलीना के अलावा ऑस्ट्रेलिया की एम्मा-सू ग्रीनट्री और तुवालू की तारोना ताफाकी को भी सीधे अंतिम चार में जगह मिली है। वहीं क्वार्टर फाइनल में इंग्लैंड की मैरी केट स्मिथ का सामना नाइजीरिया की पैट्रिशिया एमबाटा से 28 जुलाई को होगा।
कॉमनवेल्थ गेम्स की बॉक्सिंग स्पर्धा के नियमों के मुताबिक हारने वाले दोनों सेमीफाइनलिस्ट खिलाड़ियों को कांस्य पदक दिया जाता है। यानी सेमीफाइनल में पहुंचते ही पदक पक्का हो जाता है, चाहे वहां हार ही क्यों न मिले।
31 जुलाई को होगा पहला मुकाबला
लवलीना का सामना 31 जुलाई को सेमीफाइनल में तुवालू की तारोना ताफाकी से होगा। यह मुकाबला जीतने वाली खिलाड़ी सीधे फाइनल में पहुंचेगी और उसका रजत पदक पक्का हो जाएगा, जबकि हारने वाली खिलाड़ी को कांस्य पदक से संतोष करना पड़ेगा। यानी लवलीना के लिए यह मुकाबला सिर्फ यह तय करेगा कि वह ग्लासगो से सोना लेकर लौटेंगी या कांसा, पदक तो उन्हें मिल ही चुका है।
पहली बार मिलेगा कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक
यह पदक लवलीना के करियर के लिहाज से बेहद खास है, क्योंकि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स पदक होगा। इससे पहले वह दो बार इस टूर्नामेंट में उतर चुकी हैं, लेकिन दोनों बार पदक से चूक गई थीं। साल 2018 के गोल्ड कोस्ट संस्करण में वह 69 किग्रा भार वर्ग में क्वार्टर फाइनल तक पहुंची थीं, जहां उन्हें बाद में चैंपियन बनीं सैंडी रायन के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद 2022 के बर्मिंघम संस्करण में भी वह क्वार्टर फाइनल तक ही पहुंच पाई थीं। अब 75 किग्रा भार वर्ग में उतरते हुए वह आखिरकार अपने नाम पहला कॉमनवेल्थ पदक दर्ज करने जा रही हैं।
28 साल की लवलीना के नाम पहले से हैं कई बड़े पदक
28 वर्षीय लवलीना बोरगोहाईं टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीत चुकी हैं और उनके नाम विश्व चैंपियनशिप का खिताब भी दर्ज है। इसके अलावा उन्होंने एशियन गेम्स और एशियन चैंपियनशिप में भी पदक हासिल किए हैं। कॉमनवेल्थ गेम्स का पदक पक्का होने के साथ ही अब वह उन गिनी-चुनी भारतीय खिलाड़ियों में शामिल हो जाएंगी, जिन्होंने ओलंपिक, एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स तीनों बड़े मल्टी-स्पोर्ट इवेंट्स में पदक जीता हो।
गौरतलब है कि लवलीना किकबॉक्सिंग से बॉक्सिंग की दुनिया में आई थीं और तभी से उनका सफर लगातार शानदार प्रदर्शनों से भरा रहा है। ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स के उद्घाटन समारोह में लवलीना, टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता भारोत्तोलक मीराबाई चानू के साथ भारतीय दल की फ्लैग बियरर और बैटन बियरर भी रहीं।
पुरुष मुक्केबाजों को करनी होगी शुरुआत से मेहनत
महिला वर्ग में लवलीना को मिली आसान राह के उलट पुरुष वर्ग का ड्रॉ काफी बड़ा है। भारत के जदुमणि सिंह (55 किग्रा) और सचिन सिवाच (60 किग्रा) को अपना अभियान राउंड ऑफ 32 से यानी शुरुआती दौर से ही शुरू करना होगा। इन दोनों मुक्केबाजों के लिए पदक तक का रास्ता कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण रहने वाला है।
लवलीना बोरगोहाईं का यह पदक भले ही ड्रॉ के छोटे आकार की वजह से पक्का हुआ हो, लेकिन यह उनके शानदार करियर की एक और उपलब्धि है। अब सबकी निगाहें 31 जुलाई के सेमीफाइनल मुकाबले पर टिकी होंगी, जहां तय होगा कि भारत की यह स्टार मुक्केबाज ग्लासगो से सोना लेकर आती है या कांसे से ही संतोष करती है।
