दक्षिण-पूर्व एशिया में क्रिप्टो बाजार का तेज़ विकास, भारत को अब नीति में तेजी लानी होगी
सिंगापुर से लेकर फिलीपींस तक डिजिटल एसेट्स में बढ़ती संस्थागत रुचि और स्पष्ट नियामक कदम क्षेत्र को बना रहे हैं वैश्विक केंद्र, जबकि भारत की नीति अब भी जटिल और अधूरी है।
दक्षिण-पूर्व एशिया डिजिटल संपत्तियों (VDAs) के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। वहां की सरकारों के सक्रिय और स्पष्ट रुख, बढ़ते संस्थागत निवेश और तकनीकी अपनाने की उच्च दर ने इस क्षेत्र को नवाचार का हब बना दिया है। सिंगापुर, फिलीपींस, थाईलैंड, वियतनाम और इंडोनेशिया जैसे देश अपने-अपने स्तर पर डिजिटल एसेट्स को अपनाने के लिए ठोस कदम उठा रहे हैं, जिससे क्षेत्र में नियामक चुनौतियों का समाधान भी सामने आ रहा है।
सिंगापुर ने मौद्रिक प्राधिकरण (MAS) के तहत डिजिटल एसेट्स के लिए अनुकूल नीतियां लागू की हैं और सिंगापुर एक्सचेंज (SGX) अगले साल Bitcoin Perpetual Futures को लिस्ट करने जा रहा है, जिससे संस्थागत निवेशकों के लिए नए अवसर खुलेंगे। थाईलैंड ने अपने सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के माध्यम से एक्सचेंजों को ग्राहक संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं, साथ ही बिटकॉइन से भुगतान की अनुमति और टैक्स में छूट देकर क्रिप्टो की वैधता को बढ़ावा दिया है।
वियतनाम 2025 तक डिजिटल एसेट्स के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार कर रहा है, जिसमें स्वामित्व, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम, कराधान और लाइसेंसिंग शामिल होंगे। इंडोनेशिया ने जनवरी 2025 से OJK रेगुलेशन लागू कर वित्तीय संस्थानों को क्रिप्टो तकनीकों के उपयोग और रिपोर्टिंग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए हैं। फिलीपींस में डिजिटल संपत्तियों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है, जहां Coins.ph जैसे प्लेटफॉर्म पर लाखों लेन-देन रोज़ होते हैं, जो युवा और रेमिटेंस की बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं।
संस्थागत निवेश भी इस क्षेत्र में तेजी से प्रवेश कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, FalconX और Standard Chartered की साझेदारी के तहत सिंगापुर में संस्थागत क्रिप्टो सेवाएं शुरू हुई हैं, जिनका विस्तार पूरे एशिया में होने वाला है।
हालांकि, अवैध गतिविधियों का खतरा भी बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी FinCEN ने कंबोडिया की कंपनी Huione Group पर 4 अरब डॉलर की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है, जो मजबूत एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग नियमों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता को दर्शाता है।
इस तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्र के बीच भारत की क्रिप्टो नीति अभी भी प्रतिक्रिया पर आधारित और असंगठित है। विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी, अस्पष्ट नियम और कराधान के बावजूद नियामक ढांचे का अभाव निवेशकों और स्टार्टअप्स के लिए अनिश्चितता पैदा कर रहा है।
भारत के लिए अब जरूरी है कि वह एक समन्वित और स्पष्ट नीति रोडमैप तैयार करे। इसके तहत एक अंतर-मंत्रालयी समिति गठित कर VDAs के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जाएं। साथ ही, क्रिप्टो और पारंपरिक मुद्रा में कर समानता लागू की जानी चाहिए ताकि निवेशकों के लिए यह क्षेत्र अधिक आकर्षक और व्यवहारिक बन सके। निवेशकों की सुरक्षा, नियमों की स्पष्टता और नवाचार को बढ़ावा देना ही भारत को डिजिटल संपत्तियों के क्षेत्र में प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
