शिवराज सरकार एक और मोर्चे पर विफल, 10 साल में भी नहीं सुधार पाए भ्रष्टाचार मय व्यापम की कार्यप्रणाली मध्यप्रदेश का काबिल युवा दर दर की ठोकरे खाने को है मजबूर

शिवराज सरकार एक और मोर्चे पर विफल, 10 साल में भी नहीं सुधार पाए भ्रष्टाचार मय व्यापम की कार्यप्रणाली मध्यप्रदेश का काबिल युवा दर दर की ठोकरे खाने को है मजबूर

मध्य प्रदेश | 11अक्टूबर 2023

2013 में व्यापम घोटाले का जिन्न बाहर आया और बड़ी मुश्किल शिवराज तब अपनी सरकार बचा पाए,  पर लगता है शिवराज जी वह सी कुछ सीख नहीं पाए क्यूंकि व्यापम के अंदर अनियमिताएं जो की त्यों बानी हुई है। 

मामला पटवारी भर्ती का है जहाँ रिजल्ट घोषित होने के बाद पता चला की भर्ती में कही न कही कोई चूक है और पूरी भर्ती कैंसिल कर दी।

भर्ती कैंसिल की बड़ी वजह है, टोपर का कुछ आसान सवालो के जवाब भी न दे पाना। दरसल एक पत्रकार ने थर्ड टोपर से एक सवाल किया  – सवाल था, मध्य प्रदेश में  कितने जिले हैं? पटवारी परीक्षा के रिजल्ट में थर्ड टॉपर रही पूनम इसका जवाब नहीं दे पाई। बगले झाकने लगी , उनकी आवाज बार-बार गले में फसने लगी, लेकिन जवाब बाहर नहीं आ पाता। ये वीडियो वायरल हुआ और भर्ती रुक गई। एक ही कॉलेज से 7 टॉपर थे, बवाल हुआ, और जांच शुरू हो गई।

क्या MP में भर्ती परीक्षाएं कराने वाली संस्था व्यापमं का नाम बदलकर मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MP-ESB) कर देने से सब ठीक हो गया है?

मध्य प्रदेश में हर साल औसत 6.5 लाख स्टूडेंट 12वीं पास करते हैं, 4 लाख स्टूडेंट्स ग्रेजुएट होते हैं। MP के रजिस्टर्ड 39 लाख बेरोजगार सरकारी नौकरी के लिए ESB से आस लगाते हैं। पहले वैकेंसी का इंतजार, वैकेंसी आई भी, तो सीट कम होने से जी-तोड़ कॉम्पिटिशन, परीक्षा हुई तो कभी पेपर लीक, सॉल्वर कांड या फिर व्यापम घोटाले। सिलेक्शन के बाद भी सालो का इंतज़ार अब इन विद्यार्थियों के सपने चकनाचूर कर रहे है। 

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