Ghulam Ali की ‘हमको किसके गम ने मारा’ गजल क्यों है इतनी खास?
नई दल्ली: ज्यादा शब्दों के भी दिल की बात कह देता है। उनकी चर्चित गजलों में ‘हमको किसके गम ने मारा’ भी शामिल है, जिसे आज भी गजल सुनने वाले लोग पसंद करते हैं।
यह गजल खास तौर पर उन लोगों को छूती है, जिन्होंने प्यार में दूरी, इंतजार या अधूरे रिश्ते का दर्द महसूस किया है। इसकी सबसे खास बात यही है कि इसमें दर्द को बहुत शोर के साथ नहीं, बल्कि खामोशी के साथ महसूस कराया गया है।
‘हमको किसके गम ने मारा’ क्यों है इतनी खास?
गजल की खूबसूरती यही होती है कि वह कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाती है। ‘हमको किसके गम ने मारा’ भी इसी तरह की रचना है। इसमें एक ऐसे इंसान की भावनाएं दिखाई देती हैं, जो अपने दिल का दर्द अपने अंदर दबाए हुए है।
गजल में प्रेमी अपने दुख की बात करता है, लेकिन सामने वाले का नाम लेने से बचता है। यह खामोशी ही इस रचना को और ज्यादा भावुक बना देती है।
इसके बोलों में टूटे रिश्ते, अधूरा प्यार और उस दर्द की झलक मिलती है जिसे इंसान दूसरों से छिपाकर अपने अंदर रखता है।
गजल का एक बेहद चर्चित शेर है:
“दिल के लुटने का सबब न पूछो, सबके सामने नाम आएगा तुम्हारा…”
इन शब्दों में छिपी भावना साफ है। दर्द इतना गहरा है कि उसकी वजह बताने पर शायद उस इंसान का नाम सामने आ जाएगा, जिसे आज भी दिल में जगह मिली हुई है।
बारिश और गजल का रिश्ता इतना गहरा क्यों है?
बारिश का मौसम अक्सर लोगों को भावुक कर देता है। इसकी एक वजह यह भी है कि बारिश के दौरान इंसान कुछ समय के लिए अपनी रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर हो जाता है।
खिड़की पर गिरती बूंदें, ठंडी हवा और शांत माहौल पुरानी यादों को फिर से सामने ला देते हैं। ऐसे समय में अगर गुलाम अली की धीमी और भावपूर्ण आवाज सुनाई दे तो माहौल और भी खास हो जाता है।
किसी के लिए यह गजल पुराने प्यार की याद हो सकती है तो किसी के लिए किसी ऐसे रिश्ते की, जो समय के साथ पीछे छूट गया। यही वजह है कि अलग-अलग उम्र के लोग इस तरह की गजलों से खुद को जोड़ पाते हैं।
Ghulam Ali की आवाज में महसूस होता है दर्द
उस्ताद गुलाम अली को गजल गायकी के सबसे लोकप्रिय नामों में गिना जाता है। उनकी गायकी की सबसे बड़ी खासियत उनकी आवाज का उतार-चढ़ाव और शब्दों को भाव के साथ पेश करने का अंदाज है।
वह किसी शेर को सिर्फ गाते नहीं हैं, बल्कि उसके भाव को आवाज में महसूस कराने की कोशिश करते हैं। यही वजह है कि उनकी गजलें सुनते समय कई बार ऐसा लगता है जैसे कोई हमारे अपने दिल की बात कह रहा हो।
‘चुपके चुपके रात दिन’, ‘हंगामा है क्यों बरपा’ और ‘ये दिल ये पागल दिल मेरा’ जैसी गजलों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया। ‘हमको किसके गम ने मारा’ भी उनकी इसी भावपूर्ण गायकी की याद दिलाती है।
मसरूर अनवर के बोलों की खासियत
किसी भी गजल की ताकत उसके शब्दों में होती है। ‘हमको किसके गम ने मारा’ के बोल भी सीधे दिल तक पहुंचते हैं।
मसरूर अनवर ने दर्द और प्यार को ऐसे शब्दों में पिरोया कि गजल सुनने वाला आसानी से इससे जुड़ जाता है। इसमें कोई बहुत बड़ी कहानी नहीं सुनाई जाती, बल्कि छोटी-छोटी भावनाओं के जरिए एक पूरी प्रेम कहानी सामने आ जाती है।
कहीं इंतजार है, कहीं शिकायत है और कहीं ऐसा दर्द है जिसे प्रेमी किसी के सामने कहना नहीं चाहता। यही खामोश दर्द इस गजल को खास बनाता है।
26 साल बाद भी क्यों नहीं पुरानी हुई ये गजल?
समय के साथ संगीत सुनने का तरीका जरूर बदल गया है। आज लोग कुछ सेकेंड के वायरल क्लिप से गाने पहचान लेते हैं और सोशल मीडिया पर नए गाने तेजी से लोकप्रिय होते हैं।
इसके बावजूद पुरानी गजलों की अपनी जगह बनी हुई है। ‘हमको किसके गम ने मारा’ जैसी रचनाएं इस बात का उदाहरण हैं कि अच्छा संगीत किसी एक दौर तक सीमित नहीं रहता। सालों बाद भी जब कोई श्रोता इसे सुनता है तो उसके लिए इसके भाव नए हो सकते हैं, लेकिन दर्द वही रहता है।
बारिश के मौसम में सोशल मीडिया पर भी पुराने गानों और गजलों के वीडियो और क्लिप खूब देखने को मिलते हैं। लोग अपनी भावनाओं के साथ इन्हें जोड़कर शेयर करते हैं।
Ustad Ghulam Ali की ये गजलें भी जरूर सुनें
अगर आपको ‘हमको किसके गम ने मारा’ जैसी दर्द भरी गजलें पसंद हैं तो गुलाम अली की कई दूसरी रचनाएं भी सुन सकते हैं।
उनकी लोकप्रिय गजलों में ‘चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है’, ‘हंगामा है क्यों बरपा’ और ‘वो जो हम में तुम में करार था’ जैसी गजलें शामिल हैं।
इन सभी गजलों में प्यार, जुदाई, याद और रिश्तों की अलग-अलग भावनाएं देखने को मिलती हैं।
आज के दौर में भी गजल की अपनी जगह
आज म्यूजिक इंडस्ट्री में कई तरह के गाने और म्यूजिक ट्रेंड तेजी से बदल रहे हैं। पॉप, रैप और इंडी म्यूजिक युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, लेकिन गजल का अपना एक अलग श्रोता वर्ग अब भी मौजूद है।
गजल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे सुनने के लिए किसी खास उम्र या दौर की जरूरत नहीं होती। अगर शब्द दिल को छू जाएं तो एक पुरानी रचना भी बिल्कुल नई लग सकती है। गुलाम अली की आवाज इसी वजह से आज भी नई पीढ़ी तक पहुंच रही है।
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बारिश हो या अकेलापन, ये गजल बना देती है माहौल
‘हमको किसके गम ने मारा’ सिर्फ एक गजल नहीं, बल्कि उन भावनाओं की आवाज है जिन्हें इंसान कई बार किसी से कह नहीं पाता। बारिश की शाम हो, बालकनी में अकेले बैठे हों या रात में पुरानी यादों में खोए हों, गुलाम अली की आवाज इस एहसास को और गहरा कर देती है। शायद यही वजह है कि इतने साल गुजरने के बाद भी यह गजल लोगों के दिल में अपनी जगह बनाए हुए है।
कभी-कभी किसी पुराने रिश्ते को याद करने के लिए तस्वीरों की जरूरत नहीं होती। एक आवाज, कुछ शब्द और बारिश की कुछ बूंदें ही काफी होती हैं। और ऐसे ही पलों में ‘हमको किसके गम ने मारा’ जैसी गजल दिल के बहुत करीब आ जाती है।
