RBI का बड़ा प्लान भारत में जल्द आएंगे प्लास्टिक नोट
नई दिल्ली: देश में कैश के इस्तेमाल और नोटों की बढ़ती मांग के बीच करेंसी छपाई पर होने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में नोटों की छपाई पर ₹6,372 करोड़ से अधिक खर्च किये गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी ज्यादा है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि इस दौरान बड़ी संख्या में पुराने, फटे और खराब हो चुके नोटों के चलन से बाहर कर नष्ट किया गया। ऐसे नोटों की संख्या पिछले साल के मुताबिक बड़ी है, जिससे नोटो की रिपलेसमेंट और प्रिंटग पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
नोटों की बढ़ती मांग बनी बड़ी वजह
RBI के आंकड़ों के मुताबिक देश में करेंसी की कुल मांग में लगातार बढ़ रही है। खासकर ₹500 के नोट सबसे ज्यादा प्रचलन में हैं। मांग बढ़ने के साथ नए नोटों की छपाई भी बढ़ी है, जिससे कुल लागत में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार नोट बदलने और नए नोट छापने की प्रक्रिया में बड़ी राशि खर्च होती है। इसके अलावा नोटों को देशभर में पहुंचाने और पुराने नोटों को नष्ट करने की व्यवस्था भी खर्च बढ़ाती है।
23.8 अरब गंदे नोट-एक बड़ी समस्या
FY25 में 23.8 बिलियन नोट नष्ट किए गए। ₹500 के नोट सबसे ज्यादा खराब हुए, उसके बाद ₹100 के। ये नोट छापने, लॉजिस्टिक्स और नष्ट करने में भारी खर्च आता है।
पेपर नोट आसानी से फटते, गंदे होते और नकली बनाए जाते हैं। यही वजह है कि RBI अब पॉलिमर नोट्स की ओर रुख कर रहा है।
पॉलिमर नोट्स से कितनी बचत होगी?
विशेषज्ञों के अनुसार, पॉलिमर नोट्स पेपर नोट्स से 2.5 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं। ये पानी, गंदगी और फटने से बचते हैं।
संभावित फायदे:
- नोटों की लाइफ बढ़ने से प्रतिस्थापन (replacement) की जरूरत कम होगी
लंबे समय में प्रिंटिंग लागत में 30-50% तक बचत हो सकती है - नकली नोट बनाना और मुश्किल
- कम नोट नष्ट करने पड़ेंगे
ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन जैसे देश पहले से पॉलिमर नोट्स इस्तेमाल कर रहे हैं और उन्हें अच्छे परिणाम मिले हैं। RBI अब ₹10 और ₹20 जैसे छोटे नोट्स पर प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी में है।
क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि पॉलिमर नोट्स को बड़े स्तर पर लागू किया जाता है तो नोटों को बार-बार बदलने की जरूरत कम होगी। इससे प्रिंटिंग लागत में कमी आने के साथ नकली नोटों पर भी काफी हद तक रोक लगाई जा सकेगी।
हालांकि, नई तकनीक अपनाने के लिए शुरुआती निवेश अधिक होगा, लेकिन लंबे समय में यह व्यवस्था आर्थिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है।
ये भी पढ़ें- ‘Peddi’ Ticket Hike Controversy: AP ने दी हरी झंडी, Telangana में पेंच
RBI की नजर भविष्य की योजना पर
फिलहाल RBI इस दिशा में संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है। आने वाले समय में छोटे मूल्य वर्ग के नोटों पर प्रोजेक्ट शुरू किए जाने की संभावना जताई जा रही है। यदि यह सफल रहता है, तो भारत की करेंसी व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
बढ़ती प्रिंटिंग लागत और बड़ी संख्या में खराब नोटों के नष्ट होने के बीच अब सबकी नजर RBI की अगली रणनीति पर टिकी हुई है।
