अब आईसीएमएआई के कोर्स के जरिए छात्र अर्जित कर सकेंगे यूनिवर्सिटी क्रेडिट, जबकि रिसर्च और एआई आधारित प्रोजेक्ट्स पर संयुक्त पहल की जाएगी
नई दिल्ली: आईसीएमएआई और दिल्ली टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी ने शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और तकनीक के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों को पढ़ाई के साथ उद्योग से जोड़ना, रिसर्च को गति देना और कॉस्ट मैनेजमेंट में आधुनिक तकनीकी समाधानों के उपयोग को बढ़ावा देना है।
एमओयू पर आईसीएमएआई के अध्यक्ष सीएमए टीसीए श्रीनिवास प्रसाद, डीटीयू के कुलपति प्रो. प्रतीक शर्मा, आईसीएमएआई के काउंसिल सदस्य सीएमए मनोज कुमार आनंद, आईसीएमएआई के कार्यवाहक सचिव सीएमए (डॉ.) देबप्रसन्न नंदी तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए गए।
इस समझौते के तहत डीटीयू के एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट्स (एबीसी) से आईसीएमएआई के ट्रेनिंग प्रोग्राम और कोर्स जोड़े जाएंगे। इससे छात्रों को आईसीएमएआई के कोर्स के बदले यूनिवर्सिटी क्रेडिट मिलेंगे, जिन्हें जोड़कर वे अपनी डिग्री पूरी कर सकेंगे। यह पहल पढ़ाई और प्रोफेशनल ट्रेनिंग के बीच बेहतर तालमेल बनाने में मदद करेगी।
समझौते के तहत आईसीएमएआई के अंतिम चरण के छात्रों को डीटीयू के फैकल्टी सदस्यों के मार्गदर्शन में इंटर्नशिप करने का अवसर मिलेगा। इस दौरान वे लागत कम करने से जुड़े रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम करेंगे, जिनमें तकनीक, मैनेजमेंट, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल किया जाएगा।
दोनों संस्थान सरकार के लिए लागत कम करने, तकनीक के बेहतर इस्तेमाल और एआई आधारित समाधान विकसित करने से जुड़े संयुक्त रिसर्च प्रोजेक्ट्स भी करेंगे। इसके अलावा कॉस्ट एनालिटिक्स, तकनीक के जरिए कॉस्ट मैनेजमेंट और एआई के इस्तेमाल से जुड़े विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित किए जाएंगे।
इस साझेदारी के तहत हर वर्ष एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें तकनीक, डिजिटल बदलाव और कॉस्ट एनालिटिक्स के क्षेत्र में दुनिया की बेहतरीन कार्यप्रणालियों और रिसर्च पर चर्चा होगी। इसके अलावा हैकाथॉन, इंटर्नशिप और इनोवेशन प्रोग्राम के जरिए छात्रों की प्रतिभा को मंत्रालयों, सरकारी संस्थानों और उद्योगों में लागत कम करने से जुड़ी वास्तविक चुनौतियों के समाधान के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।
आईसीएमएआई के काउंसिल सदस्य सीएमए मनोज कुमार आनंद ने कहा कि यह साझेदारी प्रोफेशनल शिक्षा को नई तकनीकों और इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों के साथ जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा, “यह साझेदारी छात्रों को सीखने के नए अवसर तैयार करेगी, जहां उन्हें अकादमिक रिसर्च और प्रोफेशनल अनुभव साथ मिलेंगे कॉस्ट मैनेजमेंट को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ जोड़कर हम ऐसे प्रोफेशनल तैयार कर सकते हैं, जो भविष्य की जरूरतों के अनुरूप हों और उद्योग तथा सरकार की वास्तविक जरूरतों के मुताबिक समाधान विकसित कर सकें।”
