Parama Ekadashi 2026: क्यों खास मानी जाती है परमा एकदाशी? जानें धार्मिक महत्व
नई दिल्ली: सनातन धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन अधिकमास में आने वाली Parama Ekadashi को सबसे पुण्यदायी एकादशियों में गिना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने और जीवन के कष्टों से मुक्ति पाने का श्रेष्ठ माध्यम माना जाता है। वर्ष 2026 में परमा एकादशी का व्रत 11 जून, वीरवार को रखा जाएगा।
धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख मिलता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक परमा एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को अनेक यज्ञों और पुण्य कार्यों के समान फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों और घरों में विशेष तैयारियां की जाती हैं।
क्यों खास मानी जाती है परमा एकादशी?
Parama Ekadashi अधिकमास में आने वाली एक महत्वपूर्ण तिथि है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से पापों का क्षय होता है और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है।
धर्माचार्यों का कहना है कि यह व्रत आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। कई लोग इसे मोक्ष प्राप्ति और भगवान विष्णु की विशेष कृपा पाने का मार्ग भी मानते हैं।
भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की होती है पूजा
परमा एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा करते हैं। घरों और मंदिरों में विष्णु सहस्रनाम, गीता पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
व्रत रखने वाले श्रद्धालु दिनभर सात्विक नियमों का पालन करते हैं और फलाहार ग्रहण करते हैं। अगले दिन द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण किया जाता है।
किन लोगों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है यह व्रत?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार परमा एकादशी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है जो जीवन में सुख-समृद्धि, संतान सुख, आर्थिक उन्नति या आध्यात्मिक प्रगति की कामना रखते हैं।
इसके अलावा जो श्रद्धालु नियमित रूप से एकादशी व्रत करते हैं, उनके लिए भी यह तिथि अत्यंत शुभ मानी जाती है।
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धार्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है अधिकमास?
अधिकमास को सनातन परंपरा में अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भगवान विष्णु की उपासना, दान-पुण्य, जप और तप का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस अवधि में किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है।
श्रद्धा और भक्ति का पर्व
धार्मिक विद्वानों के अनुसार Parama Ekadashi केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और ईश्वर के प्रति समर्पण का अवसर है। इस दिन भगवान विष्णु की आराधना करने से व्यक्ति को मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक संतोष की प्राप्ति होती है।
यही वजह है कि देशभर के विष्णु मंदिरों में इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
