Teejotsav 2026: बीकानेर हाउस में राजस्थान की कला और संस्कृति का जश्न, बिक्री ₹1.30 करोड़ पार
राजस्थानी हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान की बढ़ी मांग, तीजोत्सव में 1.30 करोड़ रुपये से अधिक की बिक्री
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के बीकानेर हाउस में आयोजित तीजोत्सव 2026 का सोमवार को भव्य समापन हुआ। दस दिनों तक चले इस क्राफ्ट एवं फूड मेले में राजस्थान के हस्तशिल्प, परिधान, पारंपरिक खानपान और सांस्कृतिक उत्पादों की ₹1.30 करोड़ से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई।
राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों से आए कारीगरों, शिल्पकारों, कलाकारों और महिला स्वयं सहायता समूहों ने मेले में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की। दिल्लीवासियों और अन्य आगंतुकों ने राजस्थानी हस्तशिल्प और पारंपरिक खाद्य उत्पादों को खूब पसंद किया।
प्रमुख आवासीय आयुक्त रोहित कुमार ने कहा कि तीजोत्सव के पहले दिन से ही बीकानेर हाउस में अच्छी भीड़ रही। आगंतुकों ने हस्तशिल्प उत्पादों, राजस्थानी व्यंजनों, लोक प्रस्तुतियों और पारंपरिक खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
रूडा ने 25 स्टॉल्स के माध्यम से राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिल्प और परिधानों को प्रदर्शित किया। दूसरी ओर, राजीविका से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूहों के कलाकारों और शिल्पकारों ने 15 स्टॉल्स लगाए। यहां हैंडब्लॉक बेडशीट, सूट, साड़ियां, आभूषण, मोजड़ियां, लाख और चमड़े के उत्पाद तथा राजस्थानी व्यंजन उपलब्ध कराए गए।

सरस डेयरी के उत्पादों की बिक्री भी ₹3 लाख से अधिक रही। अलवर का कलाकंद, बीकानेर के रसगुल्ले और गुलाब जामुन, घी, छाछ, लस्सी, पनीर और श्रीखंड जैसे उत्पादों ने आगंतुकों का ध्यान खींचा।
इस दौरान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, सांसद भागीरथ चौधरी, राजस्थान के मुख्य सचिव और केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों ने मेले का दौरा किया। उन्होंने तीजोत्सव को राजस्थान की कला, संस्कृति और परंपराओं का प्रभावी मंच बताया।
15 अगस्त को शुरू हुए आयोजन में तीज माता की पारंपरिक सवारी, प्रसिद्ध लोक कलाकार कुतले खान की सूफी और राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुति तथा विभिन्न क्षेत्रों के लोक कलाकारों के कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण रहे।
तीजोत्सव 2026 ने न केवल राजस्थान के पारंपरिक उत्पादों को दिल्ली के बाजार तक पहुंचाया, बल्कि कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और छोटे उद्यमियों को सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ने का अवसर भी दिया। रिकॉर्ड बिक्री ने राजस्थान के हस्तशिल्प और पारंपरिक खानपान की बढ़ती लोकप्रियता को भी रेखांकित किया।
