आंध्र प्रदेश में छात्रा पर हमले के बाद डॉ. पॉल ने उठाए महिला सुरक्षा पर सवाल
आंध्र प्रदेश में 14 वर्षीय छात्रा पर कथित हमले के बाद डॉ. के.ए. पॉल ने महिला और बाल सुरक्षा के लिए सात अहम सुझाव दिए
नई दिल्ली: महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठे हैं। आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में 14 वर्षीय स्कूली छात्रा पर हुए कथित हमले के बाद ग्लोबल पीस इनिशिएटिव और प्रजा शांति पार्टी के अध्यक्ष डॉ. के.ए. पॉल ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राप्टाडु में 21 वर्षीय हेमंत ने कथित तौर पर प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद छात्रा पर हमला किया था। डॉ. पॉल ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि किसी लड़की की पसंद और सहमति का सम्मान होना चाहिए। रिश्ता या शादी का प्रस्ताव ठुकराने पर हिंसा को सही नहीं ठहराया जा सकता।
कड़े कानूनों के बाद भी अपराध क्यों जारी?
डॉ. पॉल ने सवाल किया कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए कड़े कानून होने के बावजूद ऐसे अपराध क्यों सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार, कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करना, पुलिस की जवाबदेही तय करना और मामलों का समय पर निपटारा करना जरूरी है।
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14 का हवाला देते हुए समान न्याय की मांग की। उनका कहना है कि कानून के सामने किसी व्यक्ति की आर्थिक या राजनीतिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए।
महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए सात सुझाव
डॉ. पॉल ने सात प्रमुख सुधारों का प्रस्ताव रखा। इनमें फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना, पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही और प्रभावशाली लोगों पर भी समान कानून लागू करना शामिल है।
उन्होंने मीडिया और सांसदों से अन्याय के मामलों को उठाने की अपील की। साथ ही, माता-पिता से बच्चों को सहमति और सम्मान का महत्व समझाने को कहा। उन्होंने महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं से पीड़ितों को कानूनी सहायता तथा सुरक्षा देने का आग्रह भी किया।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश लागू करने पर जोर
डॉ. पॉल ने सुप्रीम कोर्ट के 25 जुलाई 2019 के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की। इन निर्देशों में विशेष अदालतों की स्थापना, हाई कोर्ट समितियों के जरिए निगरानी और विशेष पुलिस टास्क फोर्स के गठन जैसे उपाय शामिल हैं।
अंत में उन्होंने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, मुख्यमंत्रियों, न्यायपालिका और पुलिस नेतृत्व से महिलाओं तथा बच्चों की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि हर लड़की और बच्चे को घर, स्कूल और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित महसूस करने का अधिकार है।
