बिहार संग्रहालय दे रहा बिहार को करीब से जानने का मौका
पटना: पटना का बिहार संग्रहालय बिहार की सभ्यता, संस्कृति और इतिहास को नई पीढ़ी तथा देश-दुनिया के दर्शकों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। आधुनिक तकनीक, आकर्षक वास्तुकला और समृद्ध कलाकृतियों के जरिए संग्रहालय बिहार के अतीत को एक नए और अनुभवात्मक अंदाज में प्रस्तुत करता है।
बिहार संग्रहालय की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई प्रमुख हस्तियां यहां आकर इसकी सराहना कर चुकी हैं। हाल ही में गायिका और गीतकार सोना मोहपात्रा ने संग्रहालय की तारीफ करते हुए कहा कि अपनी जड़ों और इतिहास को जानने की इच्छा रखने वाले लोगों को यहां जरूर आना चाहिए। उन्होंने पत्रकार सौरभ द्विवेदी द्वारा की गई संग्रहालय की प्रशंसा का भी उल्लेख किया और कहा कि यहां आने के बाद उन्हें समझ आया कि उन्होंने इसकी तारीफ क्यों की थी।
संग्रहालय की दीर्घाओं में बिहार और भारतीय इतिहास से जुड़ी हजारों महत्वपूर्ण कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। मूर्तियों, सिक्कों, पांडुलिपियों, शिलालेखों और टेराकोटा वस्तुओं के साथ मौर्य, गुप्त और पाल काल की कला यहां के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। दीदारगंज यक्षी संग्रहालय की सबसे चर्चित ऐतिहासिक धरोहरों में से एक है।
संग्रहालय बिहार की विविध सांस्कृतिक परंपराओं को भी सामने लाता है। क्षेत्रीय कला, लोक परंपराओं, मिथिला कला और समकालीन कला के लिए यहां विशेष स्थान निर्धारित किए गए हैं। बच्चों की गैलरी उन्हें खेल और इंटरैक्टिव गतिविधियों के जरिए इतिहास तथा संस्कृति से परिचित कराती है।
डिजिटल तकनीक और आधुनिक विजुअल प्रस्तुति संग्रहालय की एक और खासियत है। इंटरैक्टिव माध्यमों से ऐतिहासिक घटनाओं और कलाकृतियों को इस तरह प्रस्तुत किया जाता है कि दर्शक उन्हें अधिक आसानी से समझ सकें। संग्रहालय की वास्तुकला भी आधुनिक डिजाइन और भारतीय स्थापत्य परंपरा के बीच संतुलन कायम करती है।
7 अगस्त 2026 को स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रमों में मिथिला कला और भारतीय लोक कला की प्रदर्शनियों ने बिहार की समृद्ध कलात्मक परंपरा को रेखांकित किया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार की सांस्कृतिक विरासत, कला और ज्ञान परंपराओं को देश और दुनिया के लिए महत्वपूर्ण बताया।
आज बिहार संग्रहालय केवल अतीत को संरक्षित करने वाला संस्थान नहीं, बल्कि बिहार की सभ्यता, संस्कृति और पहचान को समझने का एक जीवंत अनुभव है। यहां इतिहास किताबों के पन्नों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कलाकृतियों, कला, तकनीक और कहानी के माध्यम से दर्शकों के सामने जीवंत हो उठता है।
