‘स्पेस गोल्ड रश’ की दिशा में बड़ा कदम, एमईआरआई में भविष्य की उपग्रह प्रयोगशाला शुरू
अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एआई की बढ़ेगी भूमिका, सॉफ्टवेयर-आधारित उपग्रह बनेंगे गेमचेंजर: सीईआरटी-इन प्रमुख
नई दिल्ली: अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से वैश्विक अर्थव्यवस्था, सामरिक सुरक्षा और उन्नत तकनीकी विकास का प्रमुख आधार बनता जा रहा है। इसी परिदृश्य पर चर्चा के लिए एमईआरआई, दिल्ली परिसर में “पेलोड, संवेदक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता : बहु-कक्षीय जटिलताएं” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सीईआरटी-इन के महानिदेशक डॉ. संजय बहल ने सॉफ्टवेयर परिभाषित उपग्रह (एसडीएस) प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और “जियोएआई-2026” प्रतिवेदन का विमोचन कर भविष्य की अंतरिक्ष तकनीकों पर प्रकाश डाला।
सम्मेलन का आयोजन एसआईए-इंडिया तथा मेरी के अंतरिक्ष अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ, जिसमें अंतरिक्ष उद्योग, इसरो, रक्षा प्रतिष्ठानों और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने भाग लेकर अगली पीढ़ी की उपग्रह प्रणालियों और अंतरिक्ष के रणनीतिक उपयोगों पर मंथन किया।
मेरी समूह के संस्थानों के उपाध्यक्ष प्रो. ललित अग्रवाल ने स्वागत भाषण में कहा कि भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए संस्थान अंतरिक्ष विज्ञान और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में विद्यार्थियों को तैयार करने के लिए निरंतर नई पहल कर रहा है। एसआईए-इंडिया के महानिदेशक अनिल प्रकाश ने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए बहु-कक्षीय उपग्रह संरचना का विकास समय की आवश्यकता है।
इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र के उपनिदेशक डॉ. एस. सी. बेरा ने संचार और नौवहन उपग्रहों, चंद्र अभियानों, बहु-कक्षीय उपग्रह प्रणालियों तथा अंतरिक्ष आधारित नौवहन के भविष्य पर विस्तार से विचार रखे। वहीं लेफ्टिनेंट जनरल पी. जे. एस. पन्नू ने रक्षा क्षेत्र में पेलोड, संवेदक प्रणालियों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के समन्वित उपयोग को भविष्य की रणनीतिक आवश्यकता बताया।
अपने संबोधन में डॉ. संजय बहल ने सॉफ्टवेयर आधारित उपग्रहों, डिजिटल परिपथों, रेडियो आवृत्तियों, क्वांटम प्रौद्योगिकी, रोबोटिकी तथा बहुउद्देशीय अंतरिक्ष प्रणालियों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में यही तकनीकें अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेंगी। ब्रिगेडियर डी. पी. गाडगे ने रक्षा अभियानों में पेलोड और संवेदक प्रणालियों की विश्वसनीयता तथा उनके सामरिक उपयोग पर अपने विचार रखे।
सम्मेलन के तकनीकी सत्रों और मुक्त विचार-विमर्श में नई अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका, नवाचार तथा दोहरे उपयोग वाले रणनीतिक अनुप्रयोगों पर व्यापक चर्चा हुई। कार्यक्रम का समापन उच्चस्तरीय गोलमेज परिचर्चा के साथ हुआ, जबकि एयर कमोडोर हिमांशु गोपाल ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
