हकीकत की कहानी: जहर-मुक्त भविष्य की ओर एक मजबूत कदम
राजस्थान के हनुमानगढ़ से शुरू हुई “हकीकत” पहल, जहर-मुक्त जीवन की दिशा में बना मजबूत मॉडल
हनुमानगढ़ को “जहर-मुक्त” बनाने का सपना, जो वर्ष 2015-16 में श्री ओम प्रकाश मांझू ने देखा था, आज तेजी से साकार होता दिख रहा है। “हकीकत” अब सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि ईमानदारी, समर्पण और वैज्ञानिक सोच पर आधारित एक मजबूत मॉडल बन चुकी है, जो विस्तार की ओर बढ़ रही है।
मिशन की शुरुआत: एक सच्चा संकल्प
हनुमानगढ़ में खेती में बढ़ते रसायनों का उपयोग और “कैंसर ट्रेन” जैसी घटनाओं ने ओम प्रकाश मांझू जी को प्रभावित किया। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी पेंशन और मेहनत से “हकीकत” (FPO) की शुरुआत की।
उनका उद्देश्य साफ था:
- जहर-मुक्त आहार: सभी को शुद्ध और सुरक्षित भोजन मिले
- जहर-मुक्त जीवन: रसायन मुक्त भोजन से स्वस्थ समाज बने
- जहर-मुक्त देश: मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित किया जाए
चुनौतियों के बीच सफलता
शुरुआत में संस्था को 22-23 लाख रुपये तक का घाटा हुआ और 2021 में ओम प्रकाश जी के निधन से बड़ा झटका लगा। इसके बावजूद टीम ने काम जारी रखा।

- नया कदम: हनुमानगढ़ टाउन में दूसरा स्टोर शुरू
- विस्तार योजना: मॉडल को अन्य शहरों तक ले जाने की तैयारी
हकीकत की खास कार्यप्रणाली
- सामूहिक पहचान: पूरी टीम का योगदान
- किसानों को लाभ: बिक्री का लगभग 90% पैसा सीधे किसानों को
- सुविधाएं: MSP, फसल बीमा और कोल्ड स्टोरेज
- गुणवत्ता: हर उत्पाद की लैब जांच, जल्द अपनी टेस्ट लैब
विश्वास और अधिकार की पहल
हकीकत का मानना है कि जहर-मुक्त भोजन हर व्यक्ति का अधिकार है।
- किफायती आपूर्ति: शुद्ध भोजन हर व्यक्ति तक पहुंचाना
- आर्थिक मजबूती: 2021 में 55 लाख रुपये के टर्नओवर से बढ़कर आज संस्था 2 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रही है
हमारा मूल मंत्र– जहर-मुक्त आहार | जहर-मुक्त जीवन | जहर-मुक्त देश
हनुमानगढ़ टाउन में दूसरे स्टोर की शुरुआत दिखाती है कि यह पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। “हकीकत” साबित कर रही है कि सही नीयत और मेहनत से किसानों की आय बढ़ाना और लोगों को स्वस्थ जीवन देना एक साथ संभव है।
